सुनहरे कागज मै लिपटा हुआ
सुबह एक ख़त मिला मुझको
बीते हुए लम्हों के करीब
बहुत करीब ले गया वह मुझको
ख़त मै लिखा था-
दिल की गहराइयों मे बसा था हर पहलू उसका
सुबह से कई बार पड़ चूका हूँ ये ख़त उसका
अब शाम होने से पहले ढूड़ना होगा पता उसका //
सफ़ीना: boat, शबीह : photograph, शबनम: dew
सुबह एक ख़त मिला मुझको
बीते हुए लम्हों के करीब
बहुत करीब ले गया वह मुझको
ख़त मै लिखा था-
"तुम यादों का सफ़ीना
साहिल पर छोड़ आये
मेरी सूनी रातों मे
एक चाँद छोड़ आये
इन आँखों मे
दो आंसू छोड़ आये
आँगन मे कुछ
शबनम की बूंदे छोड़ आये
अंजान राहों मे
जीने की वजह छोड़ आये
मेरे दिल के परदे पर
साहिल पर छोड़ आये
मेरी सूनी रातों मे
एक चाँद छोड़ आये
इन आँखों मे
दो आंसू छोड़ आये
आँगन मे कुछ
शबनम की बूंदे छोड़ आये
अंजान राहों मे
जीने की वजह छोड़ आये
मेरे दिल के परदे पर
अपनी शबीह छोड़ आये "
उस ख़त मे न कोई नाम न पता लिखा उसका दिल की गहराइयों मे बसा था हर पहलू उसका
सुबह से कई बार पड़ चूका हूँ ये ख़त उसका
अब शाम होने से पहले ढूड़ना होगा पता उसका //
सफ़ीना: boat, शबीह : photograph, शबनम: dew


4:30 pm
V G 'SHAAD'
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