Tuesday, 7 February, 2012

ख़त

सुनहरे कागज मै लिपटा हुआ
सुबह एक ख़त मिला मुझको
बीते हुए लम्हों के करीब
बहुत करीब ले गया वह मुझको

ख़त मै लिखा था-
"तुम यादों का सफ़ीना
साहिल पर छोड़ आये
मेरी सूनी रातों मे
एक चाँद छोड़ आये
इन आँखों मे
दो आंसू छोड़ आये
आँगन मे कुछ
शबनम की बूंदे छोड़ आये
अंजान राहों मे
जीने की वजह छोड़ आये
मेरे दिल के परदे पर
अपनी शबीह छोड़ आये "
उस ख़त मे न कोई नाम न पता लिखा उसका
दिल की गहराइयों मे बसा था हर पहलू उसका
सुबह से कई बार पड़ चूका हूँ ये ख़त उसका
अब शाम होने से पहले ढूड़ना होगा पता उसका //

सफ़ीना: boat, शबीह : photograph, शबनम: dew

5 comments:

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

"तुम यादों का सफ़ीना
साहिल पर छोड़ आये
मेरी सूनी रातों मे
एक चाँद छोड़ आये
इन आँखों मे
दो आंसू छोड़ आये
आँगन मे कुछ
शबनम की बूंदे छोड़ आये
अंजान राहों मे
जीने की वजह छोड़ आये
मेरे दिल के परदे पर
अपनी शबीह छोड़ आये "

Bahut khoob, umdaa rachnaa !

पश्यंती शुक्ला. said...

पहले तो रोज़ मिला करती थी छुप छुपकर
अब ये हाल है कि खत तक से मुलाकात नहीं
रात के ख्वाब सुनाती थी जिसे दिन में
उससे कहने को आज तुम्हे कोई बात नहीं

संध्या शर्मा said...

उस ख़त मे न हो कोई नाम न हो पता उसका
दिल की गहराइयों मे बसा है हर पहलू उसका
सुबह से कई बार पढ़ चुके हो ये ख़त उसका
शाम होने से पहले मिल जायेगा पता उसका ...
खूबसूरत अहसास...

Asha Saxena said...

गहरे भाव लिए रचना |
आशा

संजय भास्कर said...

बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति...खूबसूरत अहसास...

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